जब नामी-गिरामी अस्पतालों से मिला जवाब, तब काम आए डॉ. सिद्धार्थ
37 वर्षीय मरीज के पेट में था गंभीर संक्रमण, ऑपरेशन को चुनौती मानकर किया सफल इलाज; डिस्चार्ज के समय मरीज और परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू
जौनपुर। कहते हैं कि सच्चा चिकित्सक वही है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी मरीज के लिए उम्मीद की किरण बनकर खड़ा रहे। जौनपुर के वरिष्ठ सर्जन डॉ. लाल बहादुर सिद्धार्थ ने एक ऐसे ही जटिल मामले में मरीज का सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया। नामी-गिरामी अस्पतालों से जवाब मिलने के बाद जब परिवार निराश था, तब डॉ. सिद्धार्थ ने इस चुनौती को स्वीकार किया और मरीज को स्वस्थ कर अस्पताल से डिस्चार्ज किया। डिस्चार्ज के समय मरीज और उसके परिजनों की खुशी देखते ही बन रही थी।
बताया गया कि कलापुर निवासी अजय कुमार (लगभग 37 वर्ष), पुत्र दूधनाथ, काफी दिनों से पेट में तेज सूजन और दर्द से परेशान थे। बीमारी के साथ उन्हें उल्टी भी हो रही थी। परिजनों ने पहले स्थानीय स्तर पर निजी अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन राहत नहीं मिली। हालत बिगड़ने पर उन्हें वाराणसी ले जाया गया। वहां जांच के दौरान पता चला कि मरीज के पेट में नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस जैसी गंभीर स्थिति थी, जिसके लिए उच्चस्तरीय चिकित्सकीय उपचार और सर्जरी की आवश्यकता थी।
परिजनों के मुताबिक वाराणसी में इलाज के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका। इसके बाद उन्हें लखनऊ और फिर दिल्ली के अस्पतालों में दिखाया गया। दिल्ली के चिकित्सकों ने भी मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज की जटिलता बताई। परिवार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकता रहा, लेकिन बीमारी से निजात का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा था।
इसी दौरान परिजन जौनपुर के वरिष्ठ सर्जन डॉ. लाल बहादुर सिद्धार्थ के पास पहुंचे। डॉ. सिद्धार्थ ने मरीज की सभी जांच रिपोर्ट और हालत को गंभीरता से देखा। उन्होंने परिजनों को पूरी स्थिति समझाई और ऑपरेशन की चुनौती को स्वीकार करते हुए उपचार शुरू किया।
बताया गया कि ऑपरेशन से पहले मरीज के परिजनों को आवश्यक सावधानियों और संभावित जोखिमों की जानकारी दी गई। इसके बाद चिकित्सकीय टीम ने ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में धीरे-धीरे सुधार शुरू हुआ। चिकित्सकों की निगरानी में उपचार और देखभाल के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ होने की ओर बढ़ा और आखिरकार उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
डिस्चार्ज के समय छलकी खुशी
मरीज के स्वस्थ होकर घर लौटने की स्थिति देखकर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार के सदस्य डॉ. सिद्धार्थ का आभार जताते नहीं थक रहे थे। परिजनों का कहना था कि जब बड़े-बड़े अस्पतालों से उन्हें निराशा हाथ लगी, तब डॉ. सिद्धार्थ ने उनका हौसला बढ़ाया और मरीज के इलाज की जिम्मेदारी ली।
परिजनों ने कहा कि अगर वे पहले ही जौनपुर में डॉ. सिद्धार्थ के पास पहुंच गए होते तो शायद इलाज में होने वाला लाखों रुपये का खर्च भी बच सकता था। हालांकि इस पूरे मामले में सबसे बड़ी राहत यह रही कि मरीज की जान बच गई और वह स्वस्थ होकर अपने घर लौट सका।
‘समय पर सही चिकित्सक तक पहुंचना जरूरी’
इस मामले को लेकर डॉ. सिद्धार्थ का कहना है कि गंभीर बीमारी में मरीज को इधर-उधर भटकाने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। सही समय पर सही चिकित्सकीय निर्णय लेने से मरीज को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मरीज की स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था, लेकिन चिकित्सकीय टीम ने पूरी सावधानी और अनुभव के साथ उपचार किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और अंततः उसे स्वस्थ अवस्था में घर भेजा गया।
चिकित्सकीय टीम की भी हुई सराहना
मरीज के सफल उपचार में डॉ. सिद्धार्थ के साथ चिकित्सकीय टीम की भूमिका भी सराहनीय रही। परिवार ने उपचार में सहयोग करने वाले डॉ. शिवांश, डॉ. धर्मेंद्र कुमार यादव, विनोद कुमार यादव, राजेंद्र सिद्धार्थ समेत पूरी टीम के प्रति आभार जताया। परिजनों ने कहा कि चिकित्सकों की मेहनत, निगरानी और सकारात्मक रवैये ने उन्हें कठिन समय में हिम्मत दी।
यह मामला एक बार फिर बताता है कि गंभीर बीमारी के बीच मरीज और परिवार के लिए चिकित्सक का भरोसा कितना महत्वपूर्ण होता है। नामी अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद जब परिवार निराश हो चुका था, तब जौनपुर के चिकित्सक ने चुनौती स्वीकार कर मरीज को स्वस्थ कर उम्मीद को हकीकत में बदल दिया।

