भाई को सरेंडर कराने के लिए निर्दोष युवक को 4 दिन थाने में रखा! हाईकोर्ट सख्त, पुलिस पर ₹40 हजार का जुर्माना
जौनपुर। आरोपी भाई को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कराने के लिए उसके निर्दोष भाई को कथित तौर पर चार दिन तक थाने में रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने जौनपुर के बदलापुर थाना क्षेत्र के देवरिया गांव निवासी अरविंद कुमार यादव की हिरासत को गैरकानूनी मानते हुए राज्य सरकार को 40 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही यह रकम जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के वेतन से उनकी जिम्मेदारी के अनुपात में वसूलने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने हैबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 906/2026 पर नौ सितंबर को यह आदेश पारित किया।
मामला प्रयागराज के जॉर्ज टाउन थाने में दर्ज क्राइम नंबर 104/2026 से जुड़ा है। शुरुआत में मामले में बीएनएस की धारा 126(2), 191(2), 352, 115(2) और 75 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान हत्या के प्रयास से संबंधित धारा 109 बीएनएस भी जोड़ी गई।
इस मामले में अरविंद के भाई सुरेश कुमार आरोपी थे, जिन्हें बाद में अग्रिम जमानत मिल गई। याचिका में अरविंद की ओर से कहा गया कि उसका मुकदमे से कोई संबंध नहीं था, इसके बावजूद पुलिस उसे 23 जून 2026 को घर से उठाकर जॉर्ज टाउन थाने ले गई और करीब चार दिन बाद 26 जून की शाम सात बजे छोड़ा गया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अरविंद के मोबाइल नंबर का कॉल डिटेल रिकॉर्ड तलब किया। रिकॉर्ड के मुताबिक 23 जून की सुबह मोबाइल की लोकेशन बदलापुर, जौनपुर में थी। इसके बाद सुबह 7:02 बजे फूलपुर, प्रयागराज और 7:56 बजे जॉर्ज टाउन क्षेत्र में मोबाइल की लोकेशन मिली।
इसके बाद दोपहर 12:11 बजे मोबाइल बंद हो गया और 27 जून की सुबह 8:08 बजे जौनपुर में दोबारा चालू हुआ।
मामले में पेश सीसीटीवी फुटेज ने भी अरविंद की 23 से 25 जून तक जॉर्ज टाउन थाने में मौजूदगी की पुष्टि की। पुलिस की ओर से 26 जून की सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश नहीं की गई। हालांकि उपलब्ध सुपुर्दगीनामा में अरविंद को 26 जून की शाम करीब सात बजे छोड़े जाने का उल्लेख था।
सुनवाई के दौरान विवेचक अश्वनी साविता ने अदालत को बताया कि तत्कालीन एसएचओ योगेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ अरविंद के घर गया था और उसे पूछताछ के लिए थाने लाया गया था।
उपलब्ध तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अरविंद को इसलिए थाने में रखा गया, ताकि उसके भाई और मामले के आरोपी सुरेश कुमार पर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का दबाव बनाया जा सके।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से उसके ऐसे परिवार के सदस्य को हिरासत में रखना, जिसका कथित अपराध से कोई संबंध नहीं है, पुलिस की वैध कार्रवाई नहीं हो सकती।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का नुकसान चाहे कितने ही कम समय के लिए क्यों न हुआ हो, यदि हिरासत गैरकानूनी है तो वह मुआवजे का हकदार है।
अदालत ने 40 हजार रुपये मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही जिम्मेदार पुलिसकर्मियों से उनकी जिम्मेदारी के अनुपात में इस रकम की वसूली करने को कहा है। कोर्ट की नाराजगी दोनों संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी दर्ज किए जाने का आदेश दिया गया है।

