राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित रहा पंडित दीनदयाल का जीवन : गिरीश चंद्र
110वीं जयंती समारोह पर एक संगोष्ठी का आयोजन
जौनपुर। नगर के होटल रिवर व्यू में युग दृष्टा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की 110वीं जयंती समारोह पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार खेल एवं युवा कल्याण विभाग गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान को केंद्र में रखकर अंत्योदय का विचार दिया। उनका एकात्म मानववाद भारतीय संस्कृति और समाज के समग्र विकास की दृष्टि प्रस्तुत करता है। उनके विचार आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणादायी हैं।उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन सादगी, राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उनके विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास के लिए निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है।
पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि हम लोग कितने भाग्यशाली है कि हम लोगों के आदर्श पुरुष चाहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय हो, चाहे अटल बिहारी वाजपेई हो, चाहे आडवाणी जी हो... ऐसे ऐसे दिग्गज, जिनका राजनीति में कोई जोड़ नहीं है। उन्होंने कहा कि आज राजनीति का अधोपतन हो गया है। बांटने की राजनीति हो गई है। पंडित दीनदयाल जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना पूर्व जीवन दे दिया।
इससे पहले राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने खरका कॉलोनी स्थित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में अपने सरकारी आवास पर उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी पावन स्मृतियों को नमन किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र एवं प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष मनोरमा मौर्या, हरिश्चंद्र सिंह, विकास शर्मा, धर्मेंद्र मिश्रा ने अपने उद्बोधन दिए। संचालन सुरेंद्र जायसवाल ने किया। इस मौके पर जिला महामंत्री अजय सिंह, प्रतिनिधि रामसूरत मौर्य, ब्रह्मेश शुक्ला, मनीष श्रीवास्तव, गिरीश कुमार पप्पू राजपूत, राजकेशर पाल, पूर्व विधायक बांके लाल सोनकर, मंडल अध्यक्ष सारिका सोनी, कमलेश निषाद, प्रशांत सिंह दीपक, सुनील सेठ, धर्मपाल कन्नौजिया, स्वर्णिमा जायसवाल, अंजना सिंह, माधुरी गुप्ता समेत कई सम्मानित भाजपा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

