अजब गजब का खेल ,टेंडर पड़ा नहीं, ठेकेदार ने काम शुरू कर दिया!
नगर की बदहाल गलियों के बीच अधिशासी अधिकारी का आवास चमकाने पर 10 लाख और हाइडिल तिराहे के सुंदरीकरण पर 6.50 लाख खर्च की तैयारी
एक अक्टूबर को टेंडर, चार बजे खुलना है, उससे पहले काम शुरू होने से नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जौनपुर। नगर की गलियां बदहाल हैं, नालियां बजबजा रही हैं और जगह-जगह सड़कें लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। हालत यह है कि कई इलाकों में वाहन तो दूर पैदल चलना भी चुनौती बना हुआ है। दूसरी ओर नगर पालिका प्रशासन अपने अधिकारियों के आवास को चमकाने और हाइडिल तिराहे के सुंदरीकरण पर लाखों रुपये खर्च करने की तैयारी में जुटा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कार्यों के लिए अभी टेंडर प्रक्रिया पूरी भी नहीं हुई, उनमें से दो काम कथित तौर पर पहले ही शुरू करा दिए गए हैं। यही मामला अब नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
नगर पालिका प्रशासन की ओर से अधिशासी अधिकारी के आवास की मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के लिए करीब 9 लाख 89 हजार रुपये तथा हैंडिल तिराहे के सुंदरीकरण के लिए करीब 6.50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इन दोनों कार्यों समेत कुल 41 कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एक अक्टूबर 2026 को अपराह्न तीन बजे तक टेंडर डाले जाएंगे और शाम चार बजे टेंडर खोले जाएंगे।
यानी अभी टेंडर जमा होने की प्रक्रिया पूरी भी नहीं हुई है और टेंडर खुलने में भी समय बाकी है। इसके बावजूद दोनों कार्यों का मौके पर शुरू हो जाना व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
जब टेंडर खुला ही नहीं तो काम किस भरोसे पर?
नियमित प्रक्रिया के अनुसार टेंडर खुलने के बाद चयनित ठेकेदार से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराई जाती हैं। इसके बाद विभागीय स्तर पर कार्यादेश जारी होने और संबंधित इंजीनियरों की निगरानी में काम शुरू कराया जाता है। ऐसे में टेंडर खुलने से पहले ही किसी कार्य का धरातल पर शुरू हो जाना कई सवाल पैदा करता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अभी टेंडर डाला ही नहीं गया, तो काम शुरू करने वाले ठेकेदार को किस आधार पर भरोसा हो गया कि काम उसी को मिलेगा?
नगर के लोगों के बीच भी यही चर्चा है कि जब टेंडर प्रक्रिया अभी बाकी है तो किसी ठेकेदार द्वारा पहले से काम शुरू करना आखिर किस अनुमति के आधार पर हुआ?
क्या टेंडर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया?
विभागीय सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि दोनों कार्यों को लेकर पहले से ही ठेके की व्यवस्था तय किए जाने की बात सामने आ रही है और टेंडर प्रक्रिया को महज औपचारिकता के तौर पर पूरा किए जाने की चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसा है तो यह पूरी टेंडर व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा।
नगर पालिका प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि टेंडर खुलने से पहले काम शुरू कराने का आदेश किसने दिया? काम कराने वाला ठेकेदार कौन है? उसे किस आधार पर काम सौंपा गया और क्या उसके पक्ष में कोई कार्यादेश जारी हुआ है?
नगर की बदहाल गलियां इंतजार में, लाखों रुपये सुंदरीकरण पर
एक ओर नगरवासी जलभराव, टूटी सड़कों, जाम नालियों और बदहाल गलियों से परेशान हैं। दूसरी ओर लाखों रुपये अधिकारियों के आवास और तिराहे के सुंदरीकरण पर खर्च किए जाने की तैयारी है। ऐसे में प्राथमिकता को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब नजर एक अक्टूबर को होने वाली टेंडर प्रक्रिया पर है। टेंडर किसके नाम खुलता है और उससे पहले शुरू कराए गए काम को लेकर नगर पालिका प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है, यह देखने वाली बात होगी।

