विकास की गंगा के दावों के बीच गड्ढों में तब्दील आजमगढ़ हाईवे
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सेंट पैट्रिक स्कूल से पचहटिया तिराहे तक सड़क बेहाल
जौनपुर। शहर से गुजरने वाले आजमगढ़ हाईवे पर सेंट पैट्रिक स्कूल से लेकर पचहटिया तिराहे तक सड़क की हालत ऐसी हो गई है कि राहगीरों को सड़क पर चलने के बजाय गड्ढों के बीच रास्ता तलाशना पड़ रहा है। जगह-जगह उखड़ी सड़क, गहरे गड्ढे और बेतरतीब यातायात ने इस मार्ग को हादसों का खतरनाक गलियारा बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल होकर अपंगता का दंश झेल रहे हैं।
विडंबना यह है कि एक तरफ शहर में विकास की गंगा बहाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर की महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल इस मार्ग की बदहाली उन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। नगर विधायक एवं राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव विभिन्न मंचों से अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए यह दावा करते रहे हैं कि "हमने जितना किया, उतना आज तक किसी ने नहीं किया।" लेकिन सेंट पैट्रिक स्कूल से पचहटिया तिराहे तक पहुंचते ही विकास के इन दावों की तस्वीर गड्ढों के रूप में दिखाई देती है।
सड़क या मौत का रास्ता?
आजमगढ़ हाईवे शहर को प्रमुख मार्गों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। इस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। सड़क पर बने गड्ढों के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है या सामने से आ रहे वाहनों से बचने के लिए दूसरी लेन में जाना पड़ता है। यही स्थिति हादसों का खतरा और बढ़ा देती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है। पर्याप्त रोशनी के अभाव में सड़क के गड्ढे दूर से दिखाई नहीं देते। दोपहिया वाहन चालक अचानक गड्ढे में पहुंचने पर नियंत्रण खो देते हैं। कई बार पीछे से आ रहे वाहन भी दुर्घटना की चपेट में आ जाते हैं।
हादसे के बाद जागता है सिस्टम, फिर वही कहानी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत को लेकर समय-समय पर मांग उठती रही है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका। कुछ स्थानों पर मरम्मत या गड्ढा भरने का काम होता भी है तो कुछ ही समय बाद सड़क फिर उसी हालत में पहुंच जाती है। इससे सवाल उठता है कि आखिर सड़क की मरम्मत के नाम पर होने वाले काम का स्थायी असर क्यों नहीं दिखाई देता?
विकास के दावों के बीच बड़ा सवाल
जौनपुर में विकास कार्यों को लेकर सरकार और जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार उपलब्धियां गिनाई जाती हैं। शहर में सड़क, पुल, नाली, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर तमाम दावे किए जाते हैं। लेकिन जब शहर की प्रमुख सड़क ही सुरक्षित आवागमन की कसौटी पर खरी नहीं उतरती तो आम नागरिक स्वाभाविक रूप से सवाल पूछता है—आखिर विकास की गंगा बह रही है तो इस सड़क पर गड्ढों का सैलाब क्यों है?
सड़क से रोज गुजरने वाले लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग तत्काल मौके का निरीक्षण कर सड़क की स्थिति का तकनीकी आकलन कराए और महज खानापूर्ति के बजाय टिकाऊ मरम्मत कराई जाए। क्योंकि मामला केवल सड़क का नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की जिंदगी का है जो प्रतिदिन इस मार्ग से होकर गुजरते हैं।
अब सवाल यही है कि सेंट पैट्रिक से पचहटिया तक गड्ढों में तब्दील इस सड़क को लेकर जिम्मेदार कब जागेंगे—किसी और हादसे के बाद या उससे पहले?

