अमर शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त
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अत्याधुनिक मशीनों सहित लाखों के अन्य उपकरण की सुरक्षा पर उठे प्रश्न
सीएमएस ने कहा— जानकारी नहीं है, फिलहाल जांच करवाकर देखूंगा
जौनपुर। अमर शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय परिसर में लाखों रुपये कीमत के अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और अन्य सरकारी सामग्री की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में नजर आ रही है। शव गृह के बगल में बने एक भवन में सर्जिकल बेड, नवजात शिशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले आईसीयू से संबंधित ऑक्सीजन जार, वॉल फैन, सीलिंग फैन, आलमारी, ऑक्सीजन प्रेशर मीटर समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी तमाम सामग्री बेतरतीब ढंग से रखी दिखाई दे रही है। हैरानी की बात यह है कि भवन के कई दरवाजे खुले हुए हैं और मौके पर इन उपकरणों की सुरक्षा के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आती।
बताया जा रहा है कि उक्त भवन सोलर पैनल से भी सुसज्जित है। भवन के चारों दिशाओं में अंदर-बाहर आने-जाने के लिए दरवाजे बने हुए हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकांश दरवाजे खुले दिखाई दिए। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब भवन में लाखों रुपये कीमत की सरकारी सामग्री रखी है तो उसे सुरक्षित रखने के लिए दरवाजों पर ताला और निगरानी की पुख्ता व्यवस्था क्यों नहीं है?
सरकारी धन से खरीदी गई मशीनों और उपकरणों की सुरक्षा को लेकर यह स्थिति अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। आमतौर पर निजी सामान को लोग सुरक्षित रखने के लिए ताला लगाकर रखते हैं, ऐसे में सरकारी संपत्ति के प्रति भी उसी स्तर की सतर्कता अपेक्षित है। खुले भवन में महंगे उपकरणों का इस तरह रखा होना कहीं न कहीं सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय कन्नौजिया से पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि भवन में तमाम उपकरण और सामग्री रखी हुई है। जब उनसे पूछा गया कि एक दरवाजा बंद है, जबकि बाकी दरवाजे खुले क्यों हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
सीएमएस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए बताया कि भवन के पीछे की टूटी दीवार को सुरक्षा की दृष्टि से लगभग आठ फीट ऊंचा करा दिया गया है। अस्पताल परिसर में सुरक्षा गार्ड भी तैनात हैं।
अस्पताल की सुरक्षा में तैनात गार्डों की सक्रियता को लेकर भी सवाल किए गए। अस्पताल में भीड़ के दौरान पर्चा बनवाने से लेकर अन्य व्यवस्थाओं में सुरक्षा कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए। इसी तरह पूर्व में इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक के साथ कथित गाली-गलौज की घटना के दौरान सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी और सक्रियता को लेकर भी सवाल उठे थे।
इस पर सीएमएस ने बताया कि मेन गेट पर कई गार्ड तैनात रहते हैं और आने-जाने वालों पर नजर रखते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड टेंडर के माध्यम से संबंधित कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं।
इधर, अस्पताल परिसर में चर्चाओं का दौर है कि जिस भवन में नवीन उपकरण और अन्य सामग्री रखी गई है, वहां चोरी की घटना भी हुई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में पूछे जाने पर सीएमएस ने बताया कि अस्पताल के एक कर्मचारी के साथ भवन को चेक कराया गया था, लेकिन उन्हें चोरी जैसा कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पुनः जांच करा ली जाएगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भवन में लाखों रुपये कीमत के चिकित्सा उपकरण और सरकारी सामग्री रखी है तो उसके दरवाजे खुले क्यों हैं? यदि सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात हैं तो ऐसे संवेदनशील भवन की निगरानी और प्रवेश व्यवस्था कितनी प्रभावी है? सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में लापरवाही की स्थिति में यदि कोई उपकरण गायब होता है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रशासन को देना होगा।

