“84.35 मीटर की उड़ान के बाद गुरु के आंगन में लौटा जौनपुर का लाल, रोहित के हाथों में था एशियाई पदक और आंखों में संघर्ष की यादें”
रोहित यादव का खझड़ी सम्राट सत्य प्रकाश ‘मुन्ना’ के परिवार से पुराना आत्मीय संबंध रहा है। खझड़ी सम्राट के पुत्र एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुँवर शेखर गुप्ता ने विद्यार्थी जीवन में रोहित को पढ़ाया है। इसी गुरु-शिष्य संबंध की आत्मीयता को निभाते हुए रोहित अपनी बड़ी उपलब्धि के बाद उनके घर पहुंचे और आशीर्वाद लिया।
इस दौरान रोहित ने विद्यार्थी जीवन की पुरानी स्मृतियां साझा कीं और संघर्ष के दिनों में मिले स्नेह एवं मार्गदर्शन को याद किया। उन्होंने अपने गुरु के प्रति आभार जताते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन से लेकर आज तक मिला गुरुजनों का आशीर्वाद उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
गुरु के हाथों सम्मान पाकर खिले रोहित के चेहरे
खझड़ी सम्राट सत्य प्रकाश ‘मुन्ना’ ने पुष्पगुच्छ प्रदान कर एवं माल्यार्पण कर रोहित का स्वागत किया। वहीं डॉ. कुँवर शेखर गुप्ता ने उन्हें मां सरस्वती की प्रतिमा एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। गुरु के हाथों मिले इस सम्मान ने पूरे आयोजन को भावुक और यादगार बना दिया।
समाजसेवी विक्रम गुप्ता, कलाविद् रविकांत जायसवाल एवं पीके टायर के अधिष्ठाता पवन प्रजापति ने भी रोहित का माल्यार्पण कर एशियाई खेलों में शानदार उपलब्धि के लिए बधाई दी। इस अवसर पर ऋचा अग्रहरि एवं अनिता देवी भी मौजूद रहीं।
पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप पदक
रोहित यादव के लिए एशियाई खेलों का यह कांस्य पदक खास मायने रखता है। यह उनके करियर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप पदक है। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय पदक की तलाश में जुटे रोहित ने नागोया में 84.35 मीटर भाला फेंककर यह उपलब्धि हासिल की।
उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 87.68 मीटर है, जो उन्होंने 22 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में दर्ज किया था। रोहित अब एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता होने के साथ चार बार के राष्ट्रीय चैंपियन और राष्ट्रमंडल खेलों में दो बार शीर्ष आठ में स्थान बनाने वाले खिलाड़ी हैं।
‘सफलता की ऊंचाई पर भी नहीं भूले अपने लोग’
इस अवसर पर खझड़ी सम्राट सत्य प्रकाश ‘मुन्ना’ ने कहा कि रोहित यादव की सफलता जौनपुर की युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है। जौनपुर की धरती से निकलकर नागोया के अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचना और फिर पदक लेकर उसी अपनेपन के आंगन में लौटना केवल खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि परिवार के संस्कार, गुरुजनों के आशीर्वाद, संघर्ष और निरंतर मेहनत की साझा जीत है।
डॉ. कुँवर शेखर गुप्ता ने कहा कि रोहित का यह आत्मीय आगमन इस बात का प्रतीक है कि सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी व्यक्ति अपने संघर्ष के दिनों, शिक्षकों और अपने लोगों को नहीं भूलता। गुरु और शिष्य के बीच वर्षों पुराना स्नेह रविवार को उस समय फिर जीवंत हो उठा, जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर जौनपुर का नाम रोशन करने वाला शिष्य पदक लेकर अपने गुरु के घर पहुंचा।एक और भावनात्मक शीर्षक:
“84.35 मीटर की उड़ान के बाद गुरु के आंगन में लौटा जौनपुर का लाल, रोहित के हाथों में था एशियाई पदक और आंखों में संघर्ष की यादें”

