राजा हवेली में गूंजी वैदिक मंत्रों की ध्वनि, सजा राजदरबार, शस्त्र पूजन के बाद राजा पोखरे पर हुआ रावण दहन

 

जौनपुर। विजयादशमी पर जौनपुर की ऐतिहासिक राजा हवेली में राजसी परंपराओं के अनुरूप विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक राजदरबार और नजराना अर्पित करने की रस्म के बीच ऐतिहासिक विरासत की झलक देखने को मिली। इसके बाद राजा पोखरे पर भव्य मेले का आयोजन हुआ, जहां रावण दहन और शमी पूजन के साथ विजयादशमी का उत्सव संपन्न हुआ।


राजा हवेली में शस्त्र पूजन राजपुरोहित पंडित जनार्दन मिश्र की देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया गया। राजा जौनपुर अवनींद्र दत्त के अस्वस्थ होने के कारण वह महाराज दरबार हॉल में उपस्थित नहीं हो सके। हालांकि, उनकी अनुपस्थिति में भी राज परिवार की वर्षों पुरानी परंपराओं का निर्वहन पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ किया गया।


शस्त्र पूजन के अवसर पर राजा हवेली में पारंपरिक राजदरबार भी सजाया गया। दरबार में शामिल लोग राजसी गणवेश और पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। जौनपुर राज्य की पुरानी परंपराओं के अनुरूप प्रतीकात्मक रूप से नजराना अर्पित करने की रस्म भी निभाई गई। इस दौरान राजसी ठाठ-बाट, अनुशासन और ऐतिहासिक विरासत की अनूठी झलक देखने को मिली।


राजा हवेली में पूजन और दरबार की रस्मों के बाद राजा पोखरे पर विजयादशमी का मेला लगा। मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और उत्सव का आनंद लिया। यहां परंपरागत रूप से रावण दहन किया गया। इसके बाद राजपुरोहित पंडित जनार्दन मिश्र ने शमी पूजन संपन्न कराया।


इस आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ जौनपुर की ऐतिहासिक राजपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत का संगम देखने को मिला। शस्त्र पूजन से लेकर राजदरबार और राजा पोखरे के मेले तक हर रस्म ने पुरानी परंपराओं की जीवंत तस्वीर पेश की।


कार्यक्रम में डॉ. शंभू राम चौहान, प्राचार्य; सत्य राम प्रजापति, प्रबंधक; डॉ. संजय चौबे, प्रधानाचार्य; पूर्व प्राचार्य डॉ. अखिलेश्वर शुक्ल; संजय अस्थाना, श्याम सुंदर दुबे, ओम प्रकाश शाही, सुभाष चंद्र सिंह, पूर्व प्रमुख सुरेंद्र प्रताप सिंह, संत प्रसाद राय, अशोक मिश्रा, अशोक तिवारी, जियाराम यादव, आशा राम यादव, नन्हे सिंह, राज कुमार सिंह, रवि सिंह, लोलारक दुबे, प्रेम प्रकाश मिश्रा, आत्म प्रकाश यादव, डॉ. अजीत कपूर, दिनेश कपूर, आंवले यादव और अवनींद्र तिवारी सहित राज परिवार से जुड़े अनेक लोग मौजूद रहे।


आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों ने जौनपुर की ऐतिहासिक राजपरंपराओं को संरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। विजयादशमी का यह आयोजन जिले की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर सामने आया।

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